एक नए युग का आरम्भ

Posted by on Jun 11, 2009 in My Experiences, Politics, society

Continue
सन 2000 को हमने बड़ी धूमधाम से मनाया था| एक ओर जहाँ नए साल का आरम्भ होने जा रहा था वहीँ हम एक नई सदी और एक नए युग की तरफ भी बढ़ रहे थे| 20वीं सदी को अलविदा कहा और धन्यावाद दिया क्योंकि इस सदी नें हमें बहुत कुछ दिया था| इसे सही मायने में तकनिकी युग का आरम्भ समझा जा सकता है| वैसे ज्यादातर लोग मेरी इस बात से सहमत नहीं होंगे क्योंकि तकनिकी युग की शुरुआत तो भाप के इंजन के बनने से मानी जाती है| परन्तु मैं फिर भी इसे 20वीं सदी से ही मानूंगा| 21सवीं सदी में तकनीक नें सब कुछ बदल दिया है| आज मेरा लिखा हुआ यह लेख आप कितनी जल्दी और कितनी आसानी से पढ़ पा रहे हैं, यह भी सब तकनीक का ही कमा है| तो 21सवीं सदी को हम तकनीक के विकास में एक बड़ा समय मान कर चल रहे हैं| किन्तु वहीँ कुछ और भी बातें हैं जिन की ओर मेरा ध्यान वार वार जा रहा है| अगर हम हमारे देश की बात करें तो पिछली सदी के अंत में ज़रा गौर करते हैं| जनसंचार माध्यम (Mass Media) के क्षेत्र में काफी विकास हुआ और देश और दुनिया का हाल टेलिविज़न और रेडियो के द्वारा घर घर तक आसानी से और जल्दी पहुँचने लगा| पहले लोग सिनेमा देखने जाते थे, फिर वे टेलिविज़न की ओर ज्यादा आकर्षित हो गए| भारत में जब टेलिविज़न की शुरुआत हुई थी उस समय तो ऐसा लग रहा था कि शायद अब रेडियो बंद ही हो जायेगा| किन्तु किसी तरह से रेडियो आज भी अपना अस्तित्व बनाए हुए है| अब तो FM जाने के बाद रेडियो भी निखर कर सामने आया है| परन्तु टेलिविज़न नें लोगों को उस समय एक नए सूत्र में बाँध दिया धार्मिक कार्यक्रमों कि एक भीड़ सी लग गयी| महाभारत और रामायण के समय तो हमारे देश में एक सनाटा सा छा जाता था| लोग अपने सारे काम छोड़ कर या फिर जल्दी निपटा कर, अपनी सीता माता के साथ रोने कि तैयारी करते थे| यहाँ मैं आपका ध्यान एक ऐसे युग की शुरुआत की तरफ खींचना चाह रहा हूँ जिस पर शायद ही आपने कभी गौर किया हो| भक्ति युग (devotional era)|

यहाँ मैंने भारत का एक उदाहरण दिया परन्तु यह सिर्फ भारत कि ही कहानी नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया में इस युग कि शुरुआत लगभग एक साथ ही हुई| अब नए अविष्कार हो चुके थे, और इससे भी ज्यादा विष्कार करने में रूचि कम हो गयी| तकनीक भी अच्छी तरह से विकसित हो गयी| अब ऐसा लग रहा था जैसे मनो इस दुनिया में कुछ करने को ही नहीं गया| वहीँ पर हमारे रेडियो और टेलिविज़न नें लोगों के मन में भी ज़हर घोलना शुरू कर दिया| कट्टरपंथी पार्टियों नें रेडियो और टेलिविज़न का इस्तेमाल अपने उद्देश्य के लिए किया और अपने तरीके से प्रचार करने के लिए किया| अलग अलग धर्मों नें लोगों को अपनी ओर खींचना शुरू कर दिया| हमारा समाज पहले के मुकाबले अब और भी ज्यादा सांप्रदायिक और धार्मिक टुकडों में बंट रहा था| ऐसे में फिर आये बाबा लोग और वो बहती गंगा में हाथ दो कर चल दिए|

आज की जनता हले के मुकाबले और भी ज्यादा अन्धविश्वासी नज़र आने लगी है| और वहीँ इसी कारण से हर कोई अपना अपना उल्लू सीधा करने में लगा हुआ है| कुछ नए धर्म उभरते हुए नज़र रहे हैं| राधास्वामी, निरंकारी, बाबा रामदेव के योगी, डेरा साचा सौदा, ओशो, आसा राम बापू, बगेरह बगेरह| यह ही नहीं और भी काफी संघठन हैं| किन्तु यहाँ तो केवल अभी तक हिन्दू धर्म कि ही बात कि मैंने| अब सोचिये कि हाँ विश्व हिन्दू परिषद् और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिन्दू एकजुटता की बात करते हैं| इसी तरह से दुसरे धर्मों में भी लोग बंटते जा रहे हैं| भले ही आज पूछने पर वो कहते हैं कि हमारा कोई अलग धर्म नहीं है परन्तु आने वाले सम में यही सभी लोग अपने संघठन के लिए एक धर्म कि मान्यता कि लड़ाई लड़ते नज़र आयेंगे| एक दुसरे का सर फोड़ने को तैयार होंगे| वैसे कल की बात तो अभी दूर है, ये तो आज भी वैसे ही नज़र रहे हैं| ये बाबा लोग, वही पुरानी भगवान् बुध कि बातों को अपना पेश करके लोगों तक पहुंचा रहे हैं, वही गीता में से लिए गए शलोक, वही प्रभु यीशु कि बातें, वही रामायण के उपदेश| उसमें नया कुछ नहीं है| और अगर कुछ नया है तो बस वो है इन्हें लोगों तक पहुँचने का तरीका|

अब ज़रा इस ओर लोगों को और भी ज्यादा हौसला अफजाई करने वाले टेलिविज़न पर एक नज़र डालते हैं| हमारे समाचार चेनल आज लोगों को अंधविश्वास कि ओर ले जाने में तुले हैं| नागिन का बदला, नए जन्म कि कहानिया, भूतों का बसेरा, स्वर्ग की सीढ़ी, और ना ही जाने कितने और ऐसे कार्यक्रम लोगों को परोसे जा रहे हैं, जो उन्हें अन्धविश्वासी होने पर मजबूर कर रहे हैं| और फिर यही अंधविश्वास उन्हें वापिस अपने धर्म और जाति पर विश्वास करने पर मज़बूर कर देता है|

आज हमारी सारी कोशिश लोगों को अच्छी शिक्षा मुहैया करवाने तथा उन्हें एक अच्छी राह पर ले जाने पर होनी चाहिए| ज़रूरी यह है कि उन्हें बुनयादी सुबिधायें दी जायें| प्राथमिक शिक्षा के साथ साथ एक अच्छे स्वस्थ्य की ओर ध्यान दिया जाए| लोगों को अच्छे या बुरे की पहचान करने का समय दिया जाए और यह तभी हो सकता है जब वो पढ़े लिखे हों, स्वस्थ हों और वक़्त पर और पेट भरकर खाना उन्हें मिले|

मैंने अपने अनुसार यह बात आप के समक्ष रखने की कोशिश की है, और आप इस बारे में क्या सोचते हैं, कृपया अपने सुझाव ज़रूर दें| धन्यावाद !

अजय सकलानी

Tags:


Comments

  1. सही कहा भाईजान, तकनीक का कमाल न होता तो चंद मिनटों में मैं आपके विचारों को कैसे पढ़ पाता, कैसे आपको जवाब दे पाता, कैसे आप तक पहुंच पाता? संचार, सूचना, सेवा और हर वह तकनीक जो हर रोज विकसित हो रही है, अपने साथ सकारात्मक औ नकारात्मक चोला लेकर चलती है। वैसे सही मायने में तकनीकी क्रांति अब अपने बालपन में है।

  2. बहुत सही लिखा।

  3. धन्यावाद प्रवीण, परमजीत और मनोज जी, आपकी टिप्पणियों के लिए|