इस राष्ट्र में रहने वाले भक्त ही केवल राष्ट्र भक्त हैं

Posted by on Mar 8, 2016 in Blog, Society & Culture

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2013 के लोकसभा चुनाव के लिए जब भाजपा की तरफ से नरेंद्र मोदी का नाम सामने आया उस समय से एक शब्द ‘भक्त’ काफी मसहूर हो गया। सोशल मीडिया पर इस शब्द ने एक नया आंदोलन छेड़ दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ खड़े लोगों ने उनके समर्थकों को भक्त बोल-बोल कर परेशान करना शुरू कर दिया। वहीँ दूसरी तरफ बहुत से मोदी समर्थक भी अपने आप को गर्व से भक्त कहलाने लगे।

परंतु जैसे-जैसे समय बीतता गया ठीक वैसे-वैसे यह शब्द भी एक नया रूप लेता गया। और फिर ना जाने कब यह ‘भक्त’ शब्द ‘राष्ट्रभक्त’ शब्द में तबदील हो गया पता ही नहीं चला। देश में ऐसे मौके आये जब देशभक्ति की एक नई परिभाषा का निर्माण हुआ। इस परिभाषा के लिए निर्माण शब्द का इस्तेमाल इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि इसे बनाने में थोडा समय लगा। अगर यह एकाएक हुआ होता तो में इसे ‘जन्म हुआ’ कहता। इस परिभाषा के निर्माण की शुरुआत हुई ‘असहशिशुणता’ वाले मुद्दे से और फिर ‘रोहित वेमुला’ तथा जेएनयू विवाद ने तो इस परिभाषा को पूर्ण रूप दे दिया।

सोशल मीडिया पर अब आलम यह है कि लोगों ने सीधे तौर पर भक्त और देशभक्त शब्दों को प्रयायवाची शब्द के तसुर प् इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। उनका यह साफ़ कहना है कि यदि आप मोदी समर्थक हैं यानि ‘भक्त’ हैं तो ही आप ‘देशभक्त’ हैं। और यदि आप भक्त नहीं हैं तो आप सीधे तौर पर देशद्रोही हैं।  यानि इस देश में मोदी समर्थकों के अलावा बाकि सब देशद्रोही हैं। अब आप खुद सोच लीजिये कि आप देशभक्त कहलाना चाहेंगे या फिर देशद्रोही?

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