Art and Culture

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अंधी दौड़ की मंज़िल – धुल, मिट्टी और ऊंची इमारतें

Posted by Ajay Saklani on April 25, 2016  /   Comments

पता नहीं कौन सी ख़ुशी वो वहाँ तलाश रहे हैं, अपनों से दूर उस गन्दी हवा में खांस रहे हैं देश भर में जहां देखो विकास की बात हो रही है. हर तरफ विकास ही …

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क्यों बढ़ रहा है सामुदायिक भेदभाव?

Posted by Ajay Saklani on October 3, 2012  /   Comments

देश में अपना स्वामित्व कायम रखने और उसे बढ़ाने का सबसे अच्छा तरिका है कि देश भाषा और संस्कृति को ख़त्म कर दिया जाये| यह करने से लोग अपने अपने समुदाय से अलग हो जायेंगे …

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धर्म और संस्कृति – मेरे विचार

Posted by Ajay Saklani on May 31, 2010  /   Comments

कुछ दिन पहले की बात है जब मैंने भगत सिंह के विचार अपनी facebook प्रोफाइल पर लिखे थे और उन पर काफी टिप्पणियां भी आई| शायद आप में से कुछ लोगों नें उन्हें पढ़ा भी …

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पहाड़ी भाषा, संस्कृति, साहित्य और सिनेमा में विकास की ज़रूरत

Posted by Ajay Saklani on May 7, 2010  /   Comments

हमारी संस्कृति, हमारी परम्पराएं और हमारे रीती रिवाज दिन प्रतिदिन बदल रहे हैं| जहां तक परम्पराओं की बात है, उनके लिए यह ज़रूरी है कि उनमे समय समय पर बदलाव आते रहे ताकि हम बदलते …

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भाषा, संस्कृति और अपनापन……

Posted by Ajay Saklani on June 21, 2009  /   Comments

हमारे देश के विद्वान् लगातार इस बात पर ज़ोर देते रहते हैं कि हम हिन्दुस्तानी होकर शायद अपनी भाषा हिन्दी को ही भूल गए हैं| हम में दूसरी भाषाओं को आपनाने की होड़ सी लग …

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