Category: Blog

Letter to Chief Minister & Forest Minister of Himachal Pradesh

Shri Govind Singh Thakur ji, there is no update regarding any development for Himachali Cinema or Himachal Film Policy from the state government or the Department of Language, Art & Culture of Himachal Pradesh or Himachal Tourism till date. After the meeting with Shri Jairam Thakur ji, we had hopes that there will be some...

सभी की पहली फिल्म है सांझ, केवल मेरी ही नहीं

‘पहली फिल्म’ नामक शब्द के कई अर्थ होते हैं। कभी-कभी यह शब्द ग़लत तरीके से भी इस्तेमाल होता है तो कभी इसका अर्थ ग़लत तरीके से समझा जाता है। हमारी आने वाली फिल्म ‘साँझ’ के साथ भी कुछ ऐसा ही मामला है। ‘पहली फिल्म’ शब्द यहां भी कुछ ज़्यादा ही इस्तेमाल हो रहा है जो...

एक होना होगा हिमाचली कलाकारों को

साल 2014 में जब मैं वापिस हिमाचल आया और वहाँ फिल्म निर्माण का कार्य शुरू किया तो सबसे पहले ख्याल आया कि हिमाचली कलाकारों को जोड़ा जाए। क्योंकि जब तक हिमाचली कलाकार एक ना होंगे तब तक हम हिमाचल में किसी भी कला के उत्थान के लिए काम करना असंभव है। जिस तरह हम आज कोशिश...

एक ख्वाब था हिमाचली सिनेमा का

लगभग 12 साल पहले, 2005 में जब मैंने सिनेमा में कदम रखा तो हिमाचली सिनेमा का एक ख्वाब देखा था। मन में बस यही ख़याल आता था कि क्या हिमाचल में भी कभी सिनेमा की शुरुआत हो पाएगी? क्योंकि उस समय तक मुझे कोई भी ऐसा व्यक्ति नज़र नहीं आया था जो हिमाचल में सिनेमा...

India-Pakistan War not a Solution rather an End to Everything

After #UriAttack, the tension among India and Pakistan increased again. Everyone sitting in their bedroom is asking for a war. Indian media is busy in creating a propaganda. Pakistan media is doing the same on the other side. People on facebook are sharing updates like ‘Pakistan is afraid of India’, ‘Pakistan is running away’, ‘India...

Written by a PAKISTANI, loved by the INDIANS!!

Shehzad Ghias Shaikh is a Pakistani actor/comedian and his recent satirical blog about India-Pakistan War has gone viral. According to him he has been performing since he was born but he turned professional in August 2009 when he established his entertainment production company called ‘Cogito’. His article is not only loved by people in Pakistan...

ऋतिक या अध्यन की रूह भी कंगना की सोच तक नहीं पहुँच सकती

जब कोई इंसान छोटे-छोटे गाँवों में बचपन गुज़ारकर आगे बढ़ता है तो उसकी सोच और समझ शहरों में रहने, बड़े-बड़े स्कूलों में पढ़ने और बड़ी-बड़ी गाड़ियों में घूमने वालों से कहीं बढ़कर होती है. कंगना रनौत के यह शब्द जितने गहरे हैं उतनी गहरी ऋतिक रोशन या अध्यन सुमन की रूह भी नहीं पहुँच सकती।...

So is this the end to offline businesses?

In a discussion with a travel agency owner today, I came to know how the online travel business have brought down the entire travel market in Himachal and other places. He is now worried about the coming 5 years’ time. Will he be able to generate business in his travel agency the same way he...

Raising funds means loosing friends more than respect

Sometimes you feel that asking people to fund your project is like loosing your respect. Yes that happens when you keep on asking people to contribute for your project and they look at you the same way they look at any beggar. Even time comes when you feel more like begging from your friends, relatives...

अंधी दौड़ की मंज़िल – धुल, मिट्टी और ऊंची इमारतें

पता नहीं कौन सी ख़ुशी वो वहाँ तलाश रहे हैं, अपनों से दूर उस गन्दी हवा में खांस रहे हैं देश भर में जहां देखो विकास की बात हो रही है. हर तरफ विकास ही विकास नज़र आ रहा है. परन्तु सवाल यह है कि यह कैसा विकास है जहां हम अपने खूबसूरत गावों को...