My Experiences

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मुर्दों का मलाल, काश हमें लकड़ी से नहीं कचरे से जला देते

Posted by Ajay Saklani on April 12, 2016  /   Comments

बनारस में गंगा किनारे दिन रात जलती चिताओं की अग्नि कभी शांत नहीं होती। हर दिन ना जाने कितने ही मुर्दों को वहाँ मुखाग्नि दी जाती है. देश भर से लोग अपने-अपने परिजनों की आखिरी इच्छा …

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जानकारी के अभाव में गलत दिशा में ले जाता सोशल मीडिया

Posted by Ajay Saklani on March 13, 2016  /   Comments

सोशल मीडिया अपने दोस्तों के साथ जुड़ने के एक माध्यम के रूप में विकसित हुआ था और जल्दी ही यह एक विचारों के आदान-प्रदान के मंच के रूप में भी उभर गया। दुनिया भर में …

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तेरी माँ की, तेरी बहन की… बोल भारत माँ की जय

Posted by Ajay Saklani on March 9, 2016  /   Comments

इस लेख के शीर्षक में लिखे शब्दों से यदि किसी को आपत्ति हो तो माफ़ी चाहूँगा परंतु यह शब्द इस समय चल रहे हंगामे के बारे में बात करने के लिए ज़रूरी हैं। देश में …

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Beauty of Dharamshala is beyond the Politics

Posted by Ajay Saklani on March 8, 2016  /   Comments

The India-Pakistan match on 19 March 2016 during the Twenty-20 world cup 2016 may have created a tension among people living in Dharamshala or people visiting the city but the beauty of Dhauladhar hills have …

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Melghat Diaries – Journey to Malnourished Melghat

Posted by Ajay Saklani on December 2, 2015  /   Comments

It was year 2009, when I was teaching in Mahatma Gandhi International Hindi University, Wardha in Mass Communications department. One of my student came with her friend Mamta Karade to discuss about a presentation she …

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Ajay Saklani Inderhar Pass

Why I began to write blogs again?

Posted by Ajay Saklani on November 3, 2015  /   Comments

It was year 2009 when I was teaching in Mahatma Gandhi International Hindi University, Wardha, Maharashtra. Within the 2-3 days of my joining, I faced an agitation from my students against my appointment in the …

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भारतीय मीडिया : खेल सच्च और झूठ का

Posted by Ajay Saklani on June 24, 2013  /   Comments

पिछले आठ सालों से मीडिया में हूँ, काफी उतार चढ़ाव देखे। बहुत कुछ महसूस किया, समझा, सहन किया और कई वार कुछ ऐसे काम करने के लिए भी मज़बूर हुआ जिनके लिए दिल नहीं चाहता था। …

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राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी – रोज़ उजड़ते आशियाने

Posted by Ajay Saklani on April 16, 2010  /   Comments

ज़िन्दगी गुज़र जाती है एक आशियाँ बनाने में, और कुछ पल लगते हैं दिल्ली सरकार को उसे गिराने में| 15 अप्रैल को यही हुआ दिल्ली जंगपुरा स्थित इस बस्ती में| पिछले 50 सालों से बसी …

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भाषा, संस्कृति और अपनापन……

Posted by Ajay Saklani on June 21, 2009  /   Comments

हमारे देश के विद्वान् लगातार इस बात पर ज़ोर देते रहते हैं कि हम हिन्दुस्तानी होकर शायद अपनी भाषा हिन्दी को ही भूल गए हैं| हम में दूसरी भाषाओं को आपनाने की होड़ सी लग …

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एक नए युग का आरम्भ

Posted by Ajay Saklani on June 11, 2009  /   Comments

सन 2000 को हमने बड़ी धूमधाम से मनाया था| एक ओर जहाँ नए साल का आरम्भ होने जा रहा था वहीँ हम एक नई सदी और एक नए युग की तरफ भी बढ़ रहे थे| …

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