Poetry

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ये कैसा ज़माना है?

Posted by Ajay Saklani on May 20, 2010  /   Comments

डॉक्टर साहब बच्चा बीमार है, इलाज करवाना है,   क्या तेरे पास पैसे का खजाना है ?   नहीं डॉक्टर साहब अभी कमाना है,   अजीब पागल है, फिर बच्चे को कैसे बचाना है ? …

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हमारे युवा नेता

Posted by Ajay Saklani on May 31, 2009  /   Comments

वो दौड़े चले आये गरीब जनता के बीच अपना स्वामित्व स्थापित करने को, जिन्होंने आज तक एक रोटी का निवाला भी अपने हाथ से ना खाया, नौकरों के हाथों से खाना बंद हुआ तो सोने …

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बड़े बाबू

Posted by Ajay Saklani on May 31, 2009  /   Comments

दूर से दौड़ती, तेज़ दौड़ती आई एक गाड़ी रफ़्तार देख पुलिस ने सिटी मारी भैया जी की थी बड़ी मूंछे और ये लम्बी दाढ़ी बगल में बैठी भाभी जी की भी चमक रही थी साड़ी …

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