और दुल्हे बिकने लगे….

Posted by on Oct 6, 2009 in society

Continue
अभी वह एक विश्वविद्यालय में केवल एक छात्र है, यह भी नहीं पता कि पास भी हो पायेगा या नहीं, और हो भी गया तो एक डिग्री सब कुछ नहीं होती| डिग्री मिल जाने से वह कमाने नहीं लग जायेगा| हजारों लोग डिग्रियां लिए खड़े हैं, लम्बी कतारें लगी हैं मानो राशन की दुकान के बाहर खड़े हों, लेकिन नौकरी किसे मिलेगी यह कोई नहीं जानता| परन्तु उसने भविष्य का एक सहारा तलाश लिया, एक गरीब बाप को लूट लिया, शादी करने वाला है कुछ ही दिन में, बेटी के साथ साथ 10 लाख रूपया भी हेंठ लिया|

यह कहानी किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि हमारे समाज का एक भदा सच है एक काला सच| यहाँ लोग दुआ करते हैं कि उनके घर मे कभी भी बेटी पैदा ना हो| खासकर अगर यह एक गरीब परिवार की बात है तो| पहले तो उसे पाल पोस के बड़ा करो, पढ़ाओ लिखाओ और एक ऐसे संघर्ष के लिए तैयार करो जहाँ आदमी प्रधान इस समाज मे उसे आज़ादी से जीने का भी मौका नहीं मिलता| हाँ हम जानते हैं कि उसे मौका नहीं अपना हक़ चाहिए परन्तु हक़ की बातें तो खोखली होकर ही रह गयी हैं|

सालों से इंतजार करते एक बाप के लिए अब वह दिन आता है जिसका वह बेटी पैदा होने के पल से ही इंतजार कर रहा होता है| इसलिए नहीं की उसे ख़ुशी हो रही है बल्कि इस लिए कि अब उसे अपनी बेटी के लिए एक अच्छा लड़का भी खरीदना है| हमारे इस खोखले समाज की यह सबसे शान वाली बात है कि अब हम अपने बेटों को बेच कर नौकरानी के रूप मे एक बहु घर लेकर आते हैं| अब बोलियाँ लगाने का दौर शुरू हो जाता है और लोग अपने-अपने बेटे लेकर लड़की के घर वालों से मिलते हैं| और फिर अपने बेटे की बोली लगाते हैं, 8 लाख, 10 लाख, 12 लाख, 15 लाख या फिर 20 लाख…………..

यूं तो कानूनन दहेज़ लेना और देना दोनों ही अपराध हैं पर वह कानून है कहाँ? क्या किसी नें उसे कभी देखा है? या फिर वह भी दब कर रहा गया है समाज की खोखली दलीलों के सामने| दहेज़ प्रथा बंद होने के बजाये अपने पैर और भी पसार रही है| ना जाने कब तक यूं ही निर्दोष लड़कियाँ और उनके मां बाप इसी तरह दहेज़ की बलिचढ़ते रहेंगे????

Tags:


Comments

  1. Babli says:

    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए और टिपण्णी देने के लिए शुक्रिया! मेरे अन्य ब्लोगों पर भी आपका स्वागत है!

    मुझे आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा! आपने सही मुद्दे को लेकर इतना बढ़िया लिखा है जो काबिले तारीफ है! सच्चाई को आपने बखूबी प्रस्तुत किया है!

  2. दुल्हों के बिकने के लिए कहीं ना कहीं हमारा समाज भी जिम्मेवार है,जो इसे बढावा दे रहा है…

  3. वर्ष नव-हर्ष नव-उत्कर्ष नव
    -नव वर्ष, २०१० के लिए अभिमंत्रित शुभकामनाओं सहित ,
    डॉ मनोज मिश्र