ये देश मुसलमानों के साथ नहीं….

Posted by on May 13, 2010 in Media, Politics, Religion, society

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मैंने अपनी पिछली पोस्ट में लिखा था कि मीडिया भी हिंदूवादी बोली ही बोलता है| परन्तु कब कहाँ और कैसे, इसे हमारे देश के बहुत से लोग समझ नहीं पाते| यहाँ मैं कुछ ऐसे ही उदाहरणों पर रोशनी डालना चाहूँगा| अगर हम अपने समाचार चैनलों की बात करें तो वो तो हमेशा हिंदूवादी रहे ही हैं परन्तु हमारे बाकि सभी चैनल जो मनोरंजन के साधन हैं वो भी हमेशा इसी दौड़ में रहते हैं|

सबसे पहले बात समाचार चैनलों की

इंसान को सबसे ज्यादा लगाव होता है अपने धर्म, भाषा और संस्कृति से| परन्तु हमारे समाचार चैनल मुसलमानों को इसी से वंचित रखते हैं| जब भी कभी कोई त्यौहार होता है तो न्यूज़रूम हमेशा उसी रंग में रंग जाते हैं|

जब होली आती है तो सभी चैनल वाले होली के रंग में डूब जाते हैं,
बैशाखी में नाच गाना होता है,
रक्षा-बंधन में भाई बहन के प्यार को दिखाया जाता है,
गणेश उत्सव की धूम तो सबको झूमने पर मजबूर कर देती है,
दशहरा में रावण को जलाया जाता है,
और दिवाली में खूब पटाखे…..
परन्तु कहाँ गयी “ईद” ???????????????

क्या होती है ईद?
क्यों मनाई जाती है ईद? 
कौन मनाते हैं ईद?  
और कैसे मनाते हैं ईद?

…..अगर यह सवाल किसी गैर मुस्लिम से पूछा जाए तो उसे नहीं पता, जबकि एक मुसलमान किसी भी हिन्दू त्यौहार के बारे में बता सकता है| क्योंकि उसने हमेशा हमारे मीडिया से उसके बारे में सूना है, देखा है| जनसँख्या में मुसलमान हमारे देश में दुसरे नंबर पर हैं परन्तु हमारे मीडिया वाले उन्हें हमेशा नकार देते हैं| किसी मौलवी का तुगालाकिया फतवा तो ज़रूर नज़र आता है परन्तु एक आम मुसलमान कि ज़िंदगी, उसकी इच्छाएं, उसपर बीतने वालीबातें, हमारे मीडिया को नज़र नहीं आती|

अब बात दुसरे मनोरंजन के चैनलों की

क्या हमारे देश में सिर्फ हिन्दू ही रहते हैं जिन्हें मनोरंजन की ज़रूरत है? क्या अगर हम टेलीविजन कार्यक्रमों में मुसलमान परिवारों को दिखाते हैं तो हिन्दू लोग नहीं देखेंगे? हमारे चैनलों में सभी कार्यक्रम हिन्दू संस्कृति को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं| और वहीँ पर अगर मुसलमान कभी कोई उर्दू चैनल देखता हुआ नज़र आ जाता है तो कहते हैं कि देखो ये तो हमेशा यही चैनल देखते रहते हैं| आखिर उनके पास विकल्प ही क्या है? कितने उरदू चैनल हैं या फिर कितने चैनल मुसलिम संस्कृति पर कार्यक्रम बनाते हैं?

हमारे टेलीविजन कार्यक्रमों में गुज़राती होता है, बंगाली होता है, पंजाबी होता है, दक्षिण भारतीय होता है (वहाँ कितने समुदाय हैं ये वो नहीं जानते), बिहारी होता है, राजस्थानी होता है, हरयाणवी होता है और ये सभी हिन्दू होते हैं, परन्तु मुसलमान नहीं होते…..आखिर क्यों????  क्या है किसी के पास इस सवाल का जवाब?
अभी STAR network वालों नें एक नयी शुरुआत की है “STAR ALIVE ” जिसमें एक कैलेंडर बनाया है भारत में होने वाले सभी त्योहारों का…. परन्तु उसमें भी कोई मुसलिम त्यौहार शामिल नहीं है| इससे बड़ी शर्म की और क्या बात हो सकती है हमारे मीडिया के लिए….
कुछ तो शर्म करो…

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Comments

  1. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

  2. ….अगर यह सवाल किसी गैर मुस्लिम से पूछा जाए तो उसे नहीं पता, जबकि एक मुसलमान किसी भी हिन्दू त्यौहार के बारे में बता सकता है| क्योंकि उसने हमेशा हमारे मीडिया से उसके बारे में सूना है, देखा है|

    maine bhi…………..

  3. huzur aaj tak godhara kand ka bhi kuch nahi hua..
    akshar dham mandir ka kabhi kuch nahi hua….
    aapke pyare afjal ka bhi kuch nahi hua……
    bharat ki haar pe fatake fodane wale muslmano ka bhi kuch nahi hua…
    or aapke kasab ko bhi kuch nahi hoga…

    or jitane aaram se iss desh ke muslamaan rahate hain na utane to muslim rastra pakisthan main bhi nahi honge….or fir bhi india main rahane se problam hain to jakar pakisthan ya bangladesh main kyo nahi bas jate muslmaan… 1947 main algal desh diya tha na gandhi ji ne….fir kyu jyada tar musalmani orate kute ke pillo ke vesa 8-10 bache peda karati hain bharat main….or mahashay ji aap is tarah bhawana bhadkani band kijiye…aap jese logo ke karan hi ache musalmano ko bhugatana padata hian…

  4. Ajay Saklani says:

    @Nimit : huzur aaj tak godhara kand ka bhi kuch nahi hua..

    nimit ji aap kaun se godhara kaand ki baat kar rahe hain.. uski jahan train ke coach me aag laga kar hinduo ko jalaya gaya tha…??? par sawaal ye hai ki wo aag kisne lagai thi….??
    zaro tahalka ki wo report padho jo ye prove karti he ki wo aag muslims ne to nahi lagai thi… aur agar muslims ne nahi lagai thi to fir kis ne lagai thi ye aap shayad khud samajh sakate hein??? kyon wah pura drama racha gaya tha..??

  5. Ajay Saklani says:

    NIKHIL VYAS via FACEBOOK देश किसी संप्रदाय विशेष का नहीं होता, पहले सेकुलरिस्म की बात करना और फिर मुस्लिम हितो की बात करना ये अजय जी आपकी छोटी मानसिकता का भोंडा प्रदर्शन करंता है…
    आपकी सोच बहुत छोटी है और इससे आपका हे नुक्सान है….

  6. ajaya ji….tahlka koi supreme court nahi hian jisne fesa de diya ki train muslmano ne nahi jalai…. godhara main jo hua vo drama….60 hinduo ki mot drama…ajmer main 3 muslim mar gaye to atyachar…kashmir main na jane kitane hi hindu pandit mare gaye unke bare main to kabhi koi ngo ya manava dhikar nahi bolta…kya manvadhikar sirf muslims ke liye…..aapko mane ek budhijivi samjha tha jo vastav man bharat ka saman vikas chahta hian…but aapki baae sun kar mere dil ko dhes lagi….

  7. कौन सा हिन्दू है जो मुस्लिम से नफरत करता है ? कौन वो मुस्लिम है जो हिन्दुओं को मिटा देना चाहता है ? और अगर कोई है तो वो ना सही मायनों में हिन्दू है और ना ही मुसलमान !…और किस धर्म में , इंसानियत का निषेध किया गया है ? जनाब यह फिरकापरस्ती किसी इंसान की नही , हैवान की फितरत है और हैवान का कोई मज़हब नहीं होता …! गुजरात के दंगे हुए…आज भी सोचता हूँ तो खुद के हिन्दू होने पर शर्म आने लगती है …अभी दो दिन पहले लाहौर में मुसलमानों ने मुसलमानों को हलाक कर दिया , वोह भी नमाज़ अदायगी के वक़्त ….!

    कौन है यह लोग ? अलग अलग नामों का सहारा लेते हुए , कभी हरे तो कभी भगवे झंडे का डंडा थामे …इंसानियत का बेरहमी से क़त्ल करते हुए ना जाने किस धर्म स्थापना की , किस जेहाद की बात कर रहे हैं ? मुझे तो आज तक इनकी भाषा ही समझ में नहीं आई – मकसद तो क्या पल्ले पडेगा ! …और बाक़ी रही मीडीया की बात तो उसे भी अब अपनी दूकान ही चलानी है …नैतिक उत्तरदायित्व जाए भाड़ में ! हर कोई आम आदमी की चिता पर अपनी अपनी रोटियाँ सेकने में लगा हुआ है ….

    बाक़ी आपने कहा कि यह देश मुसलामानों के साथ नहीं …! तो…किसके साथ है यह देश ? क्या हिन्दुओं के साथ …सिखों के साथ ..ईसाईयों के साथ ? किसके साथ है यह देश ? दरअसल यह सिर्फ मतलबपरस्ती के साथ है…. मौक़ा परस्ती के साथ है !
    लेकिन यहाँ यह सवाल भी सर उठाता है कि आखिर यह देश है कौन ? कहाँ है यह देश ? किसका है यह देश ? क्या हम ही नहीं है यह देश ?? जब भी जहाँ भी कोई गुनाह होता है ….क्या हम उसमें बराबर के शरीक नहीं है ? इस पर भी विचार होना चाहिए …..

  8. Ajay Saklani says:

    romendra ji aap pehle vyakti hain jinhone is post par nispaksh vichar rakhe hain| aage kuchh bhi kahane se pehle me aapaka is blog me swagat karta hu. jaise ki aapane is blog ka title padha, mera asal maksad he sahi awaz ko duniya tak pahnchana. aur is post me me manata hoon ki maine title ke sath thoda khilwad kiya hai parantu wo zaruri tha. aur shayad me aisa nahi karta to aap bhi ssj is post ko shayad nahi padhate.

    ab rahi baat is desh ki. to romendra ji desh sabaka hota he bas rajniti us ko banati ya bigadati he. yahn log nahi banate bigadate.kyonki log to khud mohara banate he. mer seedha sawaal he ki media jis tarah se khilwad kar raha he wo kab tak chalega. aur media apane aap nahi kar raha ye sab, isme kahin na kahin rajanitik partiyo ka bhi haath he.