नक्सली, सलवा जुडूम, SPO, CRPF… फर्क क्या है ???

Posted by on Sep 10, 2010 in Politics, society

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सन 1991 में पहली वार महेंद्र कर्मा नाम के कांग्रेस के एक संसद नें आदिवासियों के खिलाफ जंग छेड़ी जिसे “जन जागरण अभियान” का नाम दिया गया| इस अभियान के लिए व्यापारी, उद्दयोग्पति और पूंजीपति वर्ग की और से पूरा सहयोग था| परन्तु यह अभियान जल्दी ही ख़त्म हो गया और इसे आगे बढ़ाने में वो कामयाब नहीं रहे| उसके बाद सरकार नें जब आदिवासियों की ज़मीन का सौदा टाटा (TATA ) और एस आर (ESSAR ) कंपनियों के साथ किया तो नक्सलियों से इन कंपनियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए यहाँ police और CRPF को ख़ास तौर पर तैनात किया गया| और इसी का फायदा उठाते हुए जन जागरण अभियान एक बार फिर से जिंदा हो उठा|

परन्तु अब यह यह अभियान “सलवा जुडूम” के ना से जाना जाने लगा| “सलवा जुडूम” गोंडी भाषा का शब्द है जिसका अंग्रेजी में मतलब है Peace March .

“सलवा जुडूम” को आर्थिक सहायता महेंद्र कर्मा और छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से मिलती है और हथियार पहुँचाने का काम भी छत्तीसगढ़ सरकार का ही है| दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ सरकार नें इस बात से साफ़ इनकार कर दिया था की वो सलवा जुडूम को किसी भी तरह की सहायता दे रही है| परन्तु अप्रैल 2008 में सुप्रीम कोर्ट नें छत्तीसगढ़ सरकार को लताड़ते हुए सीधे सीधे शब्दों में कहा कि वो सलवा जुडूम को हथियार देना बंद करे और राज्य में पनप रही अराजकता की स्थिति को को ख़त्म करे|

सलवा जुडूम के कुछ कारनामे इस तरह से रहे :

  • बलात्कार और हत्याएं – 4000
  • गाँव जलाए और खाली करवाए – 644
  • आदिवासी लोग उनकी जगह ज़मीन और इलाके से खदेड़े गए – 300,000 (जिनमे से 40 ,000 लोग कैम्पों में रह रहे हैं)

2005 में सलवा जुडूम की स्थापना के बाद ही नक्सलियों नें अपना अभियान और तेज कर दिया और अब तक 800 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं जिनमें से बहुत से SPO हैं – 2005 में 98 , 2006 में 29 , 2007 में 66 , 2008 में 20| परन्तु शर्म की बात यह है कि SPO राज्य और केंद्र सरकार का साझा अभियान है और उसमें 12 साल के बछो की भी भारती होती है| ज्यादातर लोग सलवा जुडूम और SPO के साथ केवल इसीलिए है क्योंकि उन्हें महीने के 1500 रुपये मिल जाते हैं जबकि इन आदिवासी ईलाकों में कमाई का उअर कोई भी साधन नहीं है| Forum for Fact-finding Documentation and Advocacy (FFDA) के अनुसार सलवा जुडूम के साथ तकरीवन 12 ,000 बच्चे हाथों में बन्दूक लिए खड़े हैं जबकि 4200 SPO में आधे से ज्यादा बच्चे 15 साल से भी कम उम्र के हैं| गृह मंत्री चिदम्बरम का कहा है कि SPO बहुत अच्छा काम कर रहे हैं और हमें जब भी ज़रूरत होगी हम और SPO की भरती करेंगे|

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