सरकार की दरिन्दगी पर NDTV की लीपा पोती

Posted by on Jun 4, 2010 in Media, Politics

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जब कोई संगठन छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में हथियार थमा देता है तो मीडिया उसकी खूब निंदा करता है और लोगों को भावुक कर अपने विश्वास में ले लेता है| परन्तु जब यही काम सरकार करती है तो किस तरह उसे देशभक्ति का नाम देकर वाहवाही बटोरी जाती है यह NDTV नें आज “आँखों देखा दंतेवाडा” नाम की एक रिपोर्ट में दिखा दिया| एक पल के लिए भी NDTV के रिपोर्टर को शर्म नहीं आई अपने सामने खड़े उस युवक को देशभक्त बताते हुए जिसने 12 साल की उम्र में सरकार द्वारा थमाई गई बन्दूक सिर्फ इस लिए पकड़ ली ताकि उसे कुछ तो रोज़गार मिले| मुकेश के हर शब्द में उसकी मज़बूरी नज़र आ रही थी जब उसने कहा की रोज़गार नहीं है तो फिर SPO (Special Police Officer) बनना पड़ा|

सरकार के कारण भाई भाई से लड़ रहा है और आदिवासी अपनो की ही ज़िंदगी उजाड़ने में लगे हुए हैं|वो यह सब समझकर भी भी ऐसा करने को मज़बूर हैं क्योंकि भूखे पेट का सवाल है| सरकार उन्हें किसी तरह का रोज़गार तो नहीं दे रही पर रोज़गार के नाम पर SPO बनाकर उनकी ज़िंदगी से ज़रूर खिलवाड़ कर रही है| हैरानी की बात है की दंतेवाडा में मरने वालों को किस तरह CRPF के जवान बताकर पूरे देश को बेवकूफ बनाया जबकि मरने वालों में SPO ज्यादा थे और CRPF के जवान कम| NDTV वाले पूरे गाँव में केवल 3 लोगों से ही बात कर पाए इसके पीछे कारण यह नहीं था कि लोग वहाँ मीडिया से बात नहीं करना चाहते, बल्कि यह साफ़ नज़र आ रहा था कि लोगों नें सरकार के खिलाफ बोला था और नक्सलियों का साथ दिया था इसलिए NDTV नें उनकी बातों को रिपोर्ट से ही हटा दिया|

पर सवाल यहाँ NDTV के पक्षपाती होने का नहीं है बल्कि सरकार की दरिन्दगी का है| जहाँ एक तरफ सरकार 14 साल से कम उम्र के बच्चों को काम करने से रोकती है और उसे बाल मज़दूरी का नाम देती है वहीँ दूसरी ओर 11 -12 साल की उम्र के बच्चों के हाथ में बन्दूक पकड़ा रही है| अगर नक्सली आतंक फैला रहे हैं (सरकार की नज़रों में) तो फिर सरकार क्या कर रही है| क्या यह सीधे सीधे मानवाधिकार के उलंघन का मामला नहीं है? और मैं आज पूछना चाहता हूँ आप सभी बुद्धिजीवियों से जो मेरी नकस्लियों के अधिकारों को लेकर उठी हर आवाज़ को दवाने की कोशिश करते हैं और उसे झूठलाने की कोशिश करते हैं, क्या आप यह सब देखने और सुनने के बाद भी यही कहेंगे की वो आतंक फैला रहे है? क्या अब भी आप सरकार के इरादों को एक पाक कदम का नाम दे रहे हैं? और अगर हाँ तो लालत है आप सभी पर और लालत है इस देश की सरकार पर|

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