Blog

जानकारी के अभाव में गलत दिशा में ले जाता सोशल मीडिया

57 Views0 Comment
Spread the love

सोशल मीडिया अपने दोस्तों के साथ जुड़ने के एक माध्यम के रूप में विकसित हुआ था और जल्दी ही यह एक विचारों के आदान-प्रदान के मंच के रूप में भी उभर गया। दुनिया भर में लोग इसका इस्तेमाल कई तरह के आन्दोलन चलाने में भी करने लगे। वहीँ राजनितिक दलों ने भी सोशल मीडिया का खूब इस्तेमाल किया। अमेरिका में होने वाले चुनाव् से लेकर भारत तक के चुनाव सोशल मीडिया के आधार पर ही लड़े गए।

वहीँ तुर्की व् सीरिया में चल रही लड़ाई भी इसी सोशल मीडिया की देन है। दूसरी तरफ दुनिया भर में आतंक का नया नाम ISIS भी सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर काफी मसहूर रहा है। एक तरफ सोशल मीडिया जहां लोगों को जोड़ने का काम कर रहा है (चाहे वो अच्छे के लिए हो या बुरे के लिए) वहीँ दूसरी तरफ यही मीडिया जानकारी के आभाव वाली एक ऐसी जनता का निर्माण भी कर रहा है जो आँखें मूँद का इसमें शेयर की जा रही अफवाहों को सच्च समझ बैठा है। जानकारी के आभाव में सोशल मीडिया में शेयर होने वाली आधी सच्चाई और आधी बनावटी बातें समाज को बांटने का काम कर रही हैं।

चाहे वो ट्विटर हो, फेसबुक हो या फिर व्हाट्सएप्प, यहां लगातार झूठ को परोसा जा रहा है और उसे सच बनाकर लोगों की भावनाओं को भड़काने का काम चल रहा है। आप इसे पढकर चौंकिये मत, यह काम हम सब मिलकर कर रहे हैं। हमारे पास आने वाले किसी भी मेसेज की सच्चाई को बिना जाने, परखे या समझे हम उसे अपने दोस्तों को भेजने में ज़रा भी देर नहीं लगाते।

इस तरह के मेसेज में सबसे गलत हैं वो मेसेज जो झूठे आंकड़े बताते हों। जैसे हिन्दू-मुसलमानों को लेकर आंकड़े, आरक्षण के आंकड़े, रोजगार के आंकड़े, किसी व्यक्ति विशेष पर आंकड़े और टिप्पणियाँ, प्रसिद्द व्यक्तियों पर हास्यास्पद बातें इत्यादि। इस तरह के मेसेज देखकर और पढ़कर हमारा खून खौल उठता है और फिर हम शुरू कर देते हैं गाली-गलौच के साथ लोगों से बातें कर देना। इसमें नुक्सान सामने वाले व्यक्ति से ज़्यादा हमारा खुद का होता है क्योंकि हम दूसरों की नज़र में खुद को एक घटिया किस्म का इंसान साबित करने में लग जाते हैं। यदि आप भी कभी इस तरह के संवाद में उलझे होंगे तो इस बात को ज़रूर समझ पाएंगे। आखिर में बस यही कहूँगा की लौट आइये और सही तथा गलत की परख किए बिना उसे आगे दूसरों के साथ साझा मत कीजिए।


Spread the love

Leave your thought