इन्हे शब्दों की ज़रूरत नहीं

Posted by on Jun 16, 2009 in society

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आज मित्र नरेश से मेल द्वारा प्राप्त हुए कुछ चित्र आपके समक्ष रख रहा हूँ| इन्हे शब्दों की ज़रूरत नहीं है, बस तस्वीरें ही सब कह जाती हैं| और अगर ज़रूरत है तो बस आपके सहयोग की|










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Comments

  1. neeraj1950 says:

    रोंगटे खड़े कर देने वाले चित्र….ज़िन्दगी कितनी बेरहम हैं…भूख जो न करवाए वो कम है…
    नीरज

  2. बेहद दर्दनाक

  3. Sudhir Kekre says:

    Hi Ajay,
    Honest attempt. great work.
    Keep it up.

  4. क्या कहें!!

  5. उड़न तश्तरी जी, कहने वाले तो बहुत है इस दुनिया में, कह कह कर सभी अपना मतलब निकलते हैं, बस अब तो कुछ करने की बारी है|

  6. swati says:

    aankhen bhar ayi meri to………
    aesa kyu hota hai

    "kisi ke paas mehal hain or kisi ke paas sir chupane ki jagah nhi"……

    "kisi ke paas bhare bhandar hain or kisi ke paas do waqt ki roti nhi"……..

    "kisi ki halat aesi hai ki subah ke bad din or raat ka guzara kaise kare"……..

    "aesa kyu hai is duniya main??????"

    "sab barabar kyu nhi hain"

  7. इस दर्द को आपने पुडिय़ा की तरह खोल दिया अपने ब्लॉग पर। कितना बेदर्द हो जाता है दर्द, जब वो दर्द न होकर उससे ऊपर उठने की कोशिश करने लगता है। इन सभी चित्रों को देखने के बाद रूद्र गला है बस और कुछ नहीं…।

  8. SIMPLE says:

    yeh kuch tasvere nahi jindagi ka aaina hai……..hum jase insaan to andaja bhi nahi laga saktey jis dard ko yeh bachpan harroj bardash karta hai…….
    lakin aaj jaroorat en par taras khaney ki nahi balke kuch easa karney ki hai ki es tarha sey yeh bachban barbad naa hoo.

  9. स्वाति…
    सभी बराबर नहीं है यही तो दुःख की बात है| मुझे मनोज सोनकर जी की कुछ पक्तियां याद आ रही हैं "
    इनका अनाज चूहे खा जाएँ,
    कुत्ते बिल्ली खा जाएँ,
    कीडे मकोडे खा जाएँ,
    ये उफ़ तक न करेंगे,
    पर एक गरीब अगर खा गया तो उसे लातें पड़ेंगी,
    घुसे पड़ेंगे,
    हड्डी पसली एक कर देंगे……
    हाँ ऐसे हैं ये सभ्य लोग,
    भला कैसे हैं ये सभ्य लोग…..?

  10. Thank you very much Swati for your comments. I'm sure u'll keep reading Aawazein and keep posting your comments. Please do let me know if there is which you don't like about this blog so that I can make it better for all….

    Thank you Simple for ur valuable comments. Keep reading and writing.

    Praveen Jakhad ji, bas padhate rahiye aur mera hausala badhate rahiye…dhanyavad.