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हमारे युवा नेता

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वो दौड़े चले आये गरीब जनता के बीच अपना स्वामित्व स्थापित करने को,
जिन्होंने आज तक एक रोटी का निवाला भी अपने हाथ से ना खाया,
नौकरों के हाथों से खाना बंद हुआ तो सोने चांदी के चमच मिल गए,
वो आज अपने नेता रुपी वंश को आगे बढ़ाते हुए युवा नेता के रूप में खिल गए ||

यही आज तक हमारे देश की बिडम्बना रही है और शायद आगे चलकर भी रहेगी,
ऐसे ही हमारी सरकार चलती रही है और शायद आगे भी चलती रहेगी,
हम खुश होते हैं आज यह देख की एक युवा नेता आया है,
ज़रा करीब से देखो तो वो साथ में विदेश से डिग्री भी लाया है,

क्या जानेगा तुम्हे वो जो ना जाने है देश को अपने,
उसने तो सदा संजोये हैं देश पर राज करने की ही सपने,
आओ तुम सब आगे बढ़कर कुर्सी तक पहुँचने में उसे सहारा दो,
उसने तो शायद इस ज़मीं पर ठीक से कदम भी नहीं रखें हैं अपने ||

अजय सकलानी


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Comments (2)

  1. धन्यावाद सुरेंदर सर, आप बस साथ चलते रहिये, लड़ाई छोटी हो या बड़ी, हम लड़ते रहेंगे|

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