पहाड़ी भाषा, संस्कृति, साहित्य और सिनेमा में विकास की ज़रूरत

Posted by on May 7, 2010 in Art and Culture, Cinema

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हमारी संस्कृति, हमारी परम्पराएं और हमारे रीती रिवाज दिन प्रतिदिन बदल रहे हैं| जहां तक परम्पराओं की बात है, उनके लिए यह ज़रूरी है कि उनमे समय समय पर बदलाव आते रहे ताकि हम बदलते युग के साथ कंधे से कन्धा मिलकर चलें| परन्तु संस्कृति में बदलाव नहीं बल्कि विकास कि ज़रूरत होती है और उसे एक नयी ऊँचाई तक पहुँचाने की ज़रूरत होती है जो कि हमारे पहाड़ी क्षेत्र में होता हुआ नज़र नहीं आ रहा|

किसी भी संस्कृति के विकास और संरक्षण के लिए ज़रूरी है साहित्य और भाषा का विकास होना| परन्तु पहाड़ी क्षेत्रों में साहित्य अभी तक उस दिशा में नहीं गया है| इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि वहां लोगों को इसकी प्रेरणा ही नहीं मिल रही और न ही आम लोगों में साहित्य और भाषा के विकास की समझ ही बन पा रही है| आज आज इस पहाड़ी क्षेत्र में शिक्षा में सुधार हो रहा है पर केवल स्कूली शिक्षा में जबकि सामाजिक, विचारिक और व्यबहारिक शिक्षा का दूर दूर तक कोई रिश्ता नाता नज़र नहीं आता|

पहाड़ी क्षेत्र में इस समय भाषा, साहित्य और सिनेमा का विकास होना बहुत ज़रूरी है| पहाड़ी कला सबसे अलग और अच्छी मानी गयी है| इतिहास में पहाड़ी कला ही भारत कि पहचान कराती है| और इस समय पहाड़ी कला के विकास में भी कदम उठाने की ज़रूरत है|

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