Tag: indian politics

क्यों बढ़ रहा है सामुदायिक भेदभाव?

देश में अपना स्वामित्व कायम रखने और उसे बढ़ाने का सबसे अच्छा तरिका है कि देश भाषा और संस्कृति को ख़त्म कर दिया जाये| यह करने से लोग अपने अपने समुदाय से अलग हो जायेंगे और उनकी एकता बिखर जायेगी| पिछले 50 सालों से हमारे देश में यही हो रहा है| इसी कारण से हमारे...

नक्सली, सलवा जुडूम, SPO, CRPF… फर्क क्या है ???

सन 1991 में पहली वार महेंद्र कर्मा नाम के कांग्रेस के एक संसद नें आदिवासियों के खिलाफ जंग छेड़ी जिसे “जन जागरण अभियान” का नाम दिया गया| इस अभियान के लिए व्यापारी, उद्दयोग्पति और पूंजीपति वर्ग की और से पूरा सहयोग था| परन्तु यह अभियान जल्दी ही ख़त्म हो गया और इसे आगे बढ़ाने में...

सरकार की दरिन्दगी पर NDTV की लीपा पोती

जब कोई संगठन छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में हथियार थमा देता है तो मीडिया उसकी खूब निंदा करता है और लोगों को भावुक कर अपने विश्वास में ले लेता है| परन्तु जब यही काम सरकार करती है तो किस तरह उसे देशभक्ति का नाम देकर वाहवाही बटोरी जाती है यह NDTV नें आज “आँखों देखा...

ये कैसा ज़माना है?

डॉक्टर साहब बच्चा बीमार है, इलाज करवाना है,   क्या तेरे पास पैसे का खजाना है ?   नहीं डॉक्टर साहब अभी कमाना है,   अजीब पागल है, फिर बच्चे को कैसे बचाना है ? बस आप ही का सहारा है डॉक्टर साहब, मुझे अपना बच्चा नहीं गवाना है,   मैंने कसम खाई है, बिना...

ये देश मुसलमानों के साथ नहीं….

मैंने अपनी पिछली पोस्ट में लिखा था कि मीडिया भी हिंदूवादी बोली ही बोलता है| परन्तु कब कहाँ और कैसे, इसे हमारे देश के बहुत से लोग समझ नहीं पाते| यहाँ मैं कुछ ऐसे ही उदाहरणों पर रोशनी डालना चाहूँगा| अगर हम अपने समाचार चैनलों की बात करें तो वो तो हमेशा हिंदूवादी रहे ही...

राजनेताओं की बात तो छोड़ो, क्या मीडिया को भी शर्म नहीं आती?

ये एक कड़वी किन्तु ऐसी सच्चाई है जिसे हर कोई जानता तो है पर समझने की कोशिश नहीं करता| ये देश मुसलमानों के साथ न कभी था और ना ही कभी होगा| अगर हम आज तक बीती हुई हर घटना पर ठीक से नज़र डालें और सोच विचार कर उसके नतीजे को समझने की कोशिश...

एक नए युग का आरम्भ

सन 2000 को हमने बड़ी धूमधाम से मनाया था| एक ओर जहाँ नए साल का आरम्भ होने जा रहा था वहीँ हम एक नई सदी और एक नए युग की तरफ भी बढ़ रहे थे| 20वीं सदी को अलविदा कहा और धन्यावाद दिया क्योंकि इस सदी नें हमें बहुत कुछ दिया था| इसे सही मायने...

हमारे युवा नेता

वो दौड़े चले आये गरीब जनता के बीच अपना स्वामित्व स्थापित करने को, जिन्होंने आज तक एक रोटी का निवाला भी अपने हाथ से ना खाया, नौकरों के हाथों से खाना बंद हुआ तो सोने चांदी के चमच मिल गए, वो आज अपने नेता रुपी वंश को आगे बढ़ाते हुए युवा नेता के रूप में...

बड़े बाबू

दूर से दौड़ती, तेज़ दौड़ती आई एक गाड़ी रफ़्तार देख पुलिस ने सिटी मारी भैया जी की थी बड़ी मूंछे और ये लम्बी दाढ़ी बगल में बैठी भाभी जी की भी चमक रही थी साड़ी || यह देख मैं हैरान था पुलिस ने किया उन्हें सलाम था मेरी समझ में कुछ ना आया मेरे मन...