indian politics

Continue

क्यों बढ़ रहा है सामुदायिक भेदभाव?

Posted by Ajay Saklani on October 3, 2012  /   Comments

देश में अपना स्वामित्व कायम रखने और उसे बढ़ाने का सबसे अच्छा तरिका है कि देश भाषा और संस्कृति को ख़त्म कर दिया जाये| यह करने से लोग अपने अपने समुदाय से अलग हो जायेंगे …

Continue

नक्सली, सलवा जुडूम, SPO, CRPF… फर्क क्या है ???

Posted by Ajay Saklani on September 10, 2010  /   Comments

सन 1991 में पहली वार महेंद्र कर्मा नाम के कांग्रेस के एक संसद नें आदिवासियों के खिलाफ जंग छेड़ी जिसे “जन जागरण अभियान” का नाम दिया गया| इस अभियान के लिए व्यापारी, उद्दयोग्पति और पूंजीपति …

Continue

सरकार की दरिन्दगी पर NDTV की लीपा पोती

Posted by Ajay Saklani on June 4, 2010  /   Comments

जब कोई संगठन छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में हथियार थमा देता है तो मीडिया उसकी खूब निंदा करता है और लोगों को भावुक कर अपने विश्वास में ले लेता है| परन्तु जब यही काम सरकार …

Continue

ये कैसा ज़माना है?

Posted by Ajay Saklani on May 20, 2010  /   Comments

डॉक्टर साहब बच्चा बीमार है, इलाज करवाना है,   क्या तेरे पास पैसे का खजाना है ?   नहीं डॉक्टर साहब अभी कमाना है,   अजीब पागल है, फिर बच्चे को कैसे बचाना है ? …

Continue

ये देश मुसलमानों के साथ नहीं….

Posted by Ajay Saklani on May 13, 2010  /   Comments

मैंने अपनी पिछली पोस्ट में लिखा था कि मीडिया भी हिंदूवादी बोली ही बोलता है| परन्तु कब कहाँ और कैसे, इसे हमारे देश के बहुत से लोग समझ नहीं पाते| यहाँ मैं कुछ ऐसे ही …

Continue

राजनेताओं की बात तो छोड़ो, क्या मीडिया को भी शर्म नहीं आती?

Posted by Ajay Saklani on May 13, 2010  /   Comments

ये एक कड़वी किन्तु ऐसी सच्चाई है जिसे हर कोई जानता तो है पर समझने की कोशिश नहीं करता| ये देश मुसलमानों के साथ न कभी था और ना ही कभी होगा| अगर हम आज …

Continue

एक नए युग का आरम्भ

Posted by Ajay Saklani on June 11, 2009  /   Comments

सन 2000 को हमने बड़ी धूमधाम से मनाया था| एक ओर जहाँ नए साल का आरम्भ होने जा रहा था वहीँ हम एक नई सदी और एक नए युग की तरफ भी बढ़ रहे थे| …

Continue

हमारे युवा नेता

Posted by Ajay Saklani on May 31, 2009  /   Comments

वो दौड़े चले आये गरीब जनता के बीच अपना स्वामित्व स्थापित करने को, जिन्होंने आज तक एक रोटी का निवाला भी अपने हाथ से ना खाया, नौकरों के हाथों से खाना बंद हुआ तो सोने …

Continue

बड़े बाबू

Posted by Ajay Saklani on May 31, 2009  /   Comments

दूर से दौड़ती, तेज़ दौड़ती आई एक गाड़ी रफ़्तार देख पुलिस ने सिटी मारी भैया जी की थी बड़ी मूंछे और ये लम्बी दाढ़ी बगल में बैठी भाभी जी की भी चमक रही थी साड़ी …

Continue