prostitution india

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कज़री का मुजरा अभी बाकि था…

Posted by Ajay Saklani on June 7, 2009  /   Comments

सच कहूँ तो प्यार हो गया था मुझे उन दिनों| एक अजीब सी बेचैनी रहती थी| मुशिकिल था मेरे लिए भुलाना उन आँखों को जिनकी खामोशी अचानक मनमोहक हो गयी थी| बस बिडम्बना यह है …

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